भारतीय शेयर बाजार में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग्स (आईपीओ) से साल 2019 में फंड जुटाने की स्पीड काफी धीमी रही। 2019 में आईपीओ से 16 कंपनियों ने सिर्फ 12,365 करोड़ रुपए जुटा पाईं। जबकि पिछले साल 24 कंपनियों ने 30,959 करोड़ रुपए जुटाए थे। रेगुलेटरी फाइलिंग और प्राइमरी मार्केट ट्रैकर प्राइम डेटाबेस के आधार पर 2015 के बाद यह सबसे कम फंड रेजिंग है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी मुख्य वजह अस्थिर शेयर बाजार, नकदी संकट और वैश्विक स्तर पर विपरीत परिस्थितियां हैं। हालांकि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से आईपीओ सेंटिमेंट में सुधार आया है। बाजार की स्थिति भी बदली है। लिहाजा 2020 में फिर से आईपीओ से फंड जुटाने की स्थिति काफी बेहतर होने की उम्मीद है। इस वित्त वर्ष में कई मजबूत कंपनियां सेबी के पास आईपीओ के लिए डॉक्यूमेंट फाइल कर चुकी हैं या करने वाली हैं। तीसरी और चौथी तिमाही में कई आईपीओ ऐसे आने वाले हैं जिसका लंबे समय से इंतजार है।
सेबी वेबसाइट के मुताबिक 27 दिसंबर तक 12 आईपीओ के ऑफर डॉक्यूमेंट अंडर प्रोसेस थे। यूटीआई एसेट मैनेजमेंट और रोसारी बॉयोटेक ने 18 दिसंबर को अपना ड्रॉफ्ट प्रॉस्पैक्टस फाइल कर दिया है। इक्विटी स्मॉल फाइनेंस बैंक और ऑनलाइन ट्रेवल कंपनी इजी-ट्रिप ने बी पेपर फाइल कर दिया है। एसबीआई क्रेडिट कार्ड के आईपीओ का भी इंतजार जिसके मजबूत एंट्री की उम्मीद है। इसने 27 नवंबर को ही अपना पेपर फाइल कर दिया था।
विशेषज्ञों के मुताबिक अर्थव्यवस्था और आय में हम रिकवरी देख रहे हैं। वैश्विक सूचकांकों में भारत के वेटेज में वृद्धि हो रही है। देश में एफएफआई पैसा काफी मात्रा में आ रहा है, जो द्वितीयक और प्राथमिक दोनों बाजारों को चला रहा है। यूएस- चाइना के बीच ट्रेड डील एक मजबूत बजट के साथ स्थिर हुई है। इससे मांग में तेजी और सरकारी खर्चों में सुधार आने की उम्मीद है।
21 कंपनियों के पास सेबी की मंजूरी
प्राइम डेटाबेस के अनुसार 21 कंपनियों के पास पहले से ही आईपीओ लाने की सेबी की मंजूरी है। पिछले दो महीनों में आईआरसीटीसी, सीएसबी बैंक और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक की दमदार लिस्टिंग से आईपीओ मार्केट का सेंटिमेंट काफी बेहतर हुआ है। स्टेट रन मैजगॉन डॉक भी पिछले महीने आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी प्राप्त कर चुकी है। यह इश्यू सरकार द्वारा पीएसयू के विनिवेश से 1.05 लाख करोड़ रुपए जुटाने का हिस्सा है।